‘मैं जो हूँ वो दिखना चाहती हूँ’
‘कहते है ना की अगर मन में करने की प्रतिभा हो तो सब मुश्किलें एक साथ आती है?’ “ मुझे बचपन से अपने समुदाय के लिए कुछ करने की प्रतिभा थी, मैं हमेशा से यही चाहती थी की इसके विकल्प मैं कैसे ढूंढ़ सकूँ साथ ही लोगों का सहयोग कैसे इनमें मिल पाए|” इसी सपने […]
तराजू के दो छोर : नारी और नेतृत्व
ख्याल न चाहते हुए भी उधर ले जाती है, जिधर मैं जाना फिजूल समझती हूँ | स्त्री, यह एक शब्द है जो प्रकृति में कोमलता, सौम्यता और ममता का बोध करवाती है। जो मीठे वचन बोलती है, जिसकी आवाज में मधुरता है और जो हर किसी को स्नेहिल वाणी से व्यवहार करती है। स्त्री एक […]
ऑटिज़म के साथ मेरा अनुभव – स्वीकृति से समावेशन तक का सफर
लगभग 4 साल हो गए ऑटिज़म को जाने समझे। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक इन चार सालों में मैंने मेडिकल मॉडल से लेकर सोशल मॉडल को बेहद करीब से परखा है। यह अनुभव मुझे ऑटिज़म जैसे बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगता के विषय में पढ़ाई करके,खुद से खोज-बिन करके और साथ हीं ऑटिज़म जैसे […]
दृष्टिकोण
इस संसार में हर आदमी का नजरिया और चीजों को देखने का दृष्टिकोण अलग-अलग होता है। कहते है, किसी को आधा ग्लास खाली दिखाता है, तो किसी को वही ग्लास आधा भरा दिखता हैं। यह अलग-अलग दृष्टिकोण नहीं तो क्या है। इन दोनों को समझना और व्यक्त करना भी एक दृष्टिकोण है। यह ब्लॉग में […]
‘कहते हैं ना हर आज का अपना एक कल होता है।’
आज इन्हीं पंक्तियों ने कुछ खुद में नए सपनों के सफलताओं को उजागर करने की चाह में आगे बढ़ गई। दोस्तों ऊपर की कही गई पंक्तियां आदर्श ग्राम,जो की कई सालों पुराने दशकों में ले जाकर एक अतीत को वर्तमान से जोड़ते हुए सपनों को जीने का आकार दिया है और उसे साकार करने में […]
लिट्टी चोखा टू मिसल पाव

मैं बिहार राज्य के मधेपुरा जिला का निवासी हूँ।मैं ग्रामीण परिवेश से आता हूँ। मैं उस परिवर्तनकाल से गुजरा हूँ ,जहां समाजिक बदलाव को मैंने काफी नजदीक से महसूस किया है।मैंने बदलाव को देखा है । मैंने उस व्यवस्था को देखा है, जहां सरकारी स्कूल में नीचे बैठ कर पढ़ना हो ,चाहे सड़कें टूटी हुई […]
साँझ
इस साँझ की कहानी कि शुरूवात मेरे JSW Fellowship में सिलेक्शन होने पर हुई। जहां हमे प्रोजेक्ट के लिए इस दुनिया के किसी शहर के पास, किसी गाँव के, किसी कोने में भेजा गया। तीन दिन के इस प्रोजेक्ट में हमने अपने पहले दिन के काम को विराम देते हुए अगले दिन के काम को […]
आदर्श ग्राम_पाटोदा
‘सफलता ही कोशिश का सार्थक अर्थ माना जाता है।जहां उन्हें उन कामों को करने और दिखाने की अथक प्रयास रखती है।इन्हीं अथक प्रयास और कोशिश के लगातार कड़ी की भूमिका निभाती है।’ दोस्तों, मैं बात कर रही हूं सुनहरे अवसरों के लाभ के जहां उनके गांवों में लोगों के सहभाग ने उस गांव को सफल […]